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मैडम के साथ फ़ोन सेक्स-10

शाम को 7 बजे उसका मेसेज आया….

आंशिका: आई एम् रेडी नाउ फॉर गोइंग टू मेरेज , तुम आओगे ना?
मे: हाँ क्यूँ नहीं आऊंगा , बोलो तो अभी आ जाऊ .

आंशिका: जी नहीं, रात को ही आना बस.
मे: ओक, कैसी लग रही है मेरी जान .

आंशिका: ठीक ही लग रही हूँ
मे: पता है मुझे, दुल्हन जैसी लग रही होगी ज़रूर बस दूल्हे का इंतेज़ार है जो रात को आएगा आधी सुहागरात मनाने .

आंशिका: ऐसा ही समझ लो. तुमने घर मैं बोल दिया?
मे: हाँ बोल दिया की मेरे फ्रेंड का बर्थडे है, सो वही जाऊंगा .

आंशिका: गुड, मुझे डर लग रहा है थोडा .
मे: क्यूँ?

आंशिका: पता नहीं, किसी ने देख लिया तो.
मे: कोई नहीं देखेगा, और अगर पकड़ भी लिया तो देख लेंगे वहीं. तुम्हारी सीनियर नहीं आई तुम्हे पिक करने अभी तक?

आंशिका: आ रही है, ओन द वे …
मे: वो क्या पहन कर आ रही है?

आंशिका: साडी और क्या
मे: किस कलर की?

आंशिका: बड़ा इंटेरेस्ट ले रहे हो उसमें.

मैने अब उसे कॉल करा.

मे: हाय
आंशिका: हाय , हाँ अब बोलो.

मे: बताओ ना किस कलर की सारी पहेंकर आने वाली है तुम्हारी सीनियर?
आंशिका: उन्होने तो ब्लॅक बोली थी.

मे: वाउ, मस्त लगेगी साली. गोरी है?
आंशिका: गोरी तो है पर 38 साल की है.

मे: तो क्या हुआ?
आंशिका: तुम जाओ उसी के साथ करो जो करना है, बाइ

मे: अरे क्या हो गया एकद्ूम से?
आंशिका: मुझे नहीं पसंद जब तुम मेरे से किसी और की बात करते हो.

मे: ओक सॉरी बाबा, नहीं करूँगा. वैसे सेक्सी है?
आंशिका: 2 बचों की मा है,

मे: ओक, मतलब अच्छी तरह इस्तेमाल हो चुकी है.
आंशिका: जी हाँ, और अब डॉन’त टॉक अबाउट हर ओर एनिवन एल्स, वरना मैं बुरा मान जाउंगी .

मे: ओक बाबा.
आंशिका: मेरी सीनियर आ गयी, मैं जा रही हूँ, बाइ

मे: मेसेज पर तो बात कर सकते हैं?
आंशिका: हाँ पर कार मैं नहीं, मॅरेज मैं पहुँचकर ही सिर्फ़.

2 घंटे बाद 9 बजे उसका मेसेज आया…..

आंशिका: क्या कर रहे हो?
मे: कुछ नहीं ऐसे ही बाहर घूम रहा हूँ(केमिस्ट के पास गया था कॉंडम लेने)

आंशिका: क्यूँ, अभी क्यूँ घूम रहे हो?
मे: अब इतना पागल नहीं हूँ की घरवालों को बोलूं की फ्रेंड की बर्थडे पार्टी 11 बजे की है, तो तभी जाऊंगा , इसीलिए अभी से बाहर आ गया हूँ

आंशिका: इतना मन है तुम्हारा मेरे से मिलने का? की 2 घंटे ऐसे ही घूमते रहोगे वेल्ले.
मे: देख लो अब, तुम्हरा ही जादू है.

आंशिका: हाँ , बस रहने दो मेरा जादू, ज़रूर कोई लड़की ताड़ रहे होंगे बाहर.
मे: हाँ एक है. गोलगप्पे खा रही है, साली मस्त है, अपनी मा के साथ है.

आंशिका: तुम फिर शुरू हो गये.
मे: ओहो, ये क्या बात है यार, तुम नहीं देख रही वहाँ और लड़कों को, सच बताना.

अँहसिका: ठीक है ना गुस्सा मत हो, पर सिर्फ़ देखना ही कुछ करना मत ओक
मे: कैसे करूँ, साली की मा साथ मैं है..

आंशिका: तुम पागल हो गये हो, हम मिल रहे हैं ना थोड़ी देर मैं, कंट्रोल करो
मे: आई नो, पर तब तक अपने आपको गरम तो कर लूँ अच्छी तरह.

आंशिका: मैं तुम्हे 10 – 10:15 के पास कॉल करूँगी बताने के लिए की कब आओ यहाँ ओक?
मे: ओक, बोलो तो अभी आ जाऊ वहीं पर.

आंशिका: अभी आकर क्या करोगे?
मे: बेलून बेचुँगा बच्चो को वहाँ बाहर.

आंशिका: गुब्बारे वाले हो क्या
मे: हाँ यार, जब सेक्सी सेक्सी भाभी पास आएँगी ना तो बस मज़ा ही आ जाएगा.

आंशिका: ठरकी विशाल
मे: ठरकी आंशिका, साली कुत्ती ..

आंशिका: ओये गाली क्यों दी , मना करा था ना पहले भी
मे: तडपाती रहती है तू बस, चूत नहीं देती, कमिनी है तू सच मैं.

आंशिका: साले तू कुत्ता, हरामी, गाली दे रहा है बेकार मैं.
मे: आज तू मिल, तेर्को दिखौँगा अपना हरामीपन, साली.

आंशिका: हाँ मैं भी देख लूँगी, कितना दम है तेरे मैं.
मे: साली बोल ऐसे रही है, जैसे चूत दे देगी आज

आंशिका: बेकार के सपने मत देख, जा अब मैं खाने जा रही हूँ बाइ.
मे: किसी का लंड मत खा जआइओ ग़लती से.

उसका 10: 20 पर कॉल आया..

आंशिका: हाय ,
मे: हाय

आंशिका: मैं यहाँ से 10 मीं मैं निकलूंगी, तुम आ जाओ
मे: आ रहा हूँ

आंशिका: क्या हुआ इतने उखड़े उखड़े क्यूँ हो?

मे: और नहीं तो क्या, 2 घंटे से बेकार घर के बाहर घूम रहा हूँ, की कब फ्री होगी, और तू है की मज़े कर रही है वहाँ.

आंशिका: सो सॉरी यार, मेरी वजह से तुम बोर हुए, अछा गली देने का मान है तो देलो.
मे: वो तो दे ही रहा हूँ मन मैं, कुतिया साली.

आंशिका: अछा मेरे नाराज़ कुत्ते, कितनी देर मैं आ रहा है यहाँ?
मे: 10 मीं मैं.

आंशिका: ठीक है आजा जल्दी, आई एम् वेटिंग और हाँ सॉरी .
मे: वहाँ आऊंगा तब बोल्*िओ.

आंशिका: ओक आजा, बाइ

मैने एक कॉंडम का पॅकेट ले लिया था इस उम्मीद मैं की कहीं ये साली आज चूत दे डाले मुझे , ये गुस्सा तो बस एक बहाना था इसे गाली देने का और बाद मैं इसका एडवांटेज लेने का. सो मैं अब वहाँ से चल पड़ा वेन्यू की और. उस दिन बहुत मॅरेजस थी, हर जगह पंडाल, बॅंक्वेट हॉल सजे हुए थे, मतलब की बहुत सारी लड़कियाँ चुदने वाली थी अगले दिन अपनी सुहग्रात मैं. मैं स्पीड से बाईक चला रहा था ताकि वहाँ जल्दी पहुँचुन. मैं वेन्यू पर पहुँच गया वहाँ जाकर देखा तो 4 – 4 पंडाल आमने सामने लगे हैं, मुझे नहीं पता था की हू उनमे से किस में है. मैने उसे फोन करा….

मे: हेलो,
आंशिका: हाय , कहाँ हो.

मे: मैं पहुँच गया पर तुम किस शादी मैं हो.
आंशिका: किरण वेड्स अनिल वाली मैं हूँ

मे: बाहर आओ.
आंशिका: आती हूँ 5 मीं, एक बार अपनी फ्रेंड ब्राइड से मिल आऊ ओके .

10 मीं बाद वो मुझे ढूंढते हुए बाहर आई, मैने बाईक पंडाल के साइड मैं लगा रखी थी और मैं वहीं पर खड़ा था और वो उसी पंडाल से बाहर आई अपनी सीनियर के साथ और मुहे इधर उधर देखने लगी. मैने दोनो को देखा, मेरी आंशिका तो साली मस्त ही लग रही थी, पूरी पिंकिंश बनके आई हुई थी, उसको देखते ही दिल मैं ठंडक पड़ी, फिर मैने उसकी सीनियर को देखा तो मुँह से निकला – ओह भेन्चोद ! ये क्या चीज़ है. साली लंबी चौड़ी, एकद्ूम गोरी, चुचियाँ बड़ी बड़ी चूतड़ों ने तो अपनी धाक जमा रखी थी उसके शरीर पर, मेरा तो उसे देखते ही एकदम टन हो गया, मन करा आंशिका के साथ साथ इसे भी बजा दूं आज.

मैं होश मैं आया आंशिका को बुलाने लगा, पर एकद्ूम से रुक गया की क्या कह कर बुलाऊ उसकी सीनियर के सामने, उसने मुझे अपना कजन बताया हुआ है अपनी सीनियर को, पहले मैंसे सोचा की आंशिका दीदी कह कर पुकारूँ फिर मैने सोचा की नहीं दीदी नहीं बोलता नाम से ही बुलाता हूँ. मैने उसे आवाज़ लगाई – “आंशिका, अंशिका में यहाँ हूँ,..”

उसने और उसकी सीनियर ने पलट कर देखा एकदम से. साली दोनो एक दम माल लग रही थी, मुझे तो दोनो नंगी दिख रही थी एकदम , उसकी सीनियर के सामने मेरी फट रही थी पता नहीं क्यूँ, ऐसा ल्ग रहा था की वो आकर के मेरी गांड मार देगी.

उसकी सीनियर का जब मैने फेस देखा तो देखता ही रह गया, साली के एकद्ूम ब्राइट फीचर्स थे, लिप्स एक दम मस्त, चूसने लायक, गाल गोल मटोल , आँखें शराबी और उपर से ये मेकउप करके आई हुई थी, कातिल लग रही थी, दोनो ही आंशिका और उसकी सीनियर पसीने मैं डूबे हुए थे जिससे उनकी छाती लाइट्स मैं चमक रही ही. जैसे जैसे दोनो मेरे पास आ रही थी मेर्को डर भी लग रहा था और बेचैनी भी हो रही थी, सालियों की गांड का जवाब नहीं, सबको पीछे छोड़ दिया रेस मैं. मेरे पास आई आंशिका और हँसते हुए बोली

आंशिका: आ गये, तुम परेशानी तो नहीं हुई?

मे: नहीं.
सीनियर: अनु ये है तुम्हारा कजन ?

आंशिका: हाँ मेम, विशाल, विशाल ये हैं मेरी सीनियर मेम , बताया था न …वोही है.

मे: हेलो मेम
सीनियर: ही, कितने छोटे हो तुम अनु से?

(मुझसे ये सवाल क्यूँ पूछने लगी साली?)

मे: 8 या 9 साल छोटा हूँ, क्यूँ?
सीनियर: इतनी बड़ी है अनु तुम से फिर भी नाम लेकर पुकारते हुए.

मे: (हंसते हुए) वो बचपन से ही आदत है

आंशिका: (बीच मैं बोली) माँ ये ऐसा ही है बदतमीज़, लाख बार समझा चुकी हूँ की थोड़ी इज़्ज़त दे लिया कर मुझे, बट सुनता ही नहीं.

हम साथ मैं हंस पड़े

( मैं इसकी इज़्ज़त लेने मैं लगा हूँ और ये देने की बात कर रही है)

सीनियर: अनु तूने इस बेचारे को ड्राइवर बना दिया, अपने साथ मॅरेज मैं ही ले आती.
आंशिका: मैं इसे बोल रही थी की चल साथ मेरे, बट कह रहा था मैं नहीं जाऊंगा . मैने तो बहुत समझाया

( झूठी साली)

सीनियर: कैसे जाओगे अब?
मे: मैं बाईक लाया हूँ.

सीनियर: ओक, गुड. ध्यान से जाना, रात का समय है.
मे: हाँ ज़रूर.

सीनियर: चल अनु मैं भी चलती हूँ, घर पर बच्चे याद कर रहे होंगे मुझे.
आंशिका: ओक मेम , देन चलते हैं, बाइ

सीनियर: बाइ अनु.
मे: गुड नाइट मेम

उसने मुझे स्माइल पास करी और बोली

सीनियर: बाइ, गुड नाइट. ध्यान से जाना दोनो, अगर कहो तो मैं कार में ड्रॉप कर दूं .
अँहसिका: नो थॅंक्स मेम , हम चले जाएँगे बाइ.

मैं अपनी बाईक पर आकर बैठ गया, उसकी सीनियर भी अपनी कार मैं जाकर बैठ गयी और कार स्टार्ट करके जाने लागी, मैं जान भुज कर आराम से खड़ा रहा उसके जाने का वेट करने लगा. उसने अपनी कार निकाली. जब वो चली गयी मैने अनु से कहा – चल बैठ अब.

वो बैठी मैने बाईक स्टार्ट करी और हम वहाँ से निकल पड़ी पर आगे मोड़ पर उसकी सीनियर की कार खड़ी मिली और उसने हूमें हाथ देकर रोका.

सीनियर: विशाल किस रास्ते से जा रहे हो तुम?

( मैने मन मैं कहा ये भेंन का लोडा क्या नया ड्रामा है अब,)

उसे 5 मीं बताया, उसे रास्ता क्लियर नहीं था वहाँ का उसे समझाया और वहाँ से भेजा. और फिर मैने बाईक स्टार्ट करी और दूसरे रास्ते पर निकल पड़ा अनु को लेकर. वो आज बिल्कुल सट कर बैठी थी मेरे साथ, जब वो साँस से ले रही थी मुझे उसके बूब्स पूरे महसूस हो रहे थे अपनी बेक पर, वो मुझसे एकद्ूम वाइफ की तरह चिपक कर बैठी थी, बहुत मज़ा आ रहा था. पर मैं इन सब बातों मैं ये भूल गया की इससे मज़े कहाँ लूँगा, ये तो मैं डिसाइड करना ही भूल गया.

मैं अपना दिमाग़ चला रहा था रास्ते मैं की कोई जगह याद आ जाए की कोई ना हो इस वक़्त वहाँ, वैसे भी रात के 11 बाज रहे थे. आगे रास्ते पर एक पंडाल के बाहर कुछ लोग क्रॅकर्स जला रहे थे, उसी के पास 2 – 3 पंडाल और भी थे, वहाँ रोड पर ही कार पार्क थी, उसके पीछे एक बहुत बड़ा पार्क था, मैने सोचा की यहाँ ट्राइ करके देखत हूँ क्या पता की कोई जगह मिल जाए, मेने बाईक मोड़ ली उस तरफ, आंशिका बोली….

आंशिका: ये किसकी शादी मैं जा रहे हो?
मे; किसी की भी नहीं, पीछे पार्किंग मैं जा रहा हूँ उसके पीछे पार्क है.

वो समझ गयी…थोडा दरी और बोली..

आंशिका: पार्क मैं? कोई हुआ तो?
मे: हुआ तो वापस आ जाएँगे, पहले जाने तो दे.


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